जीवन का सार
पहले सोचों] फिर समझों तब बोलो] फिर करो
तीन बातों को ध्यान
में रखों : -
1 कम खाना
2 कम सोना
3 गम खाना (संयमं) ये स्वास्थ्य के लक्षण है।
प्रातः विहार (भ्रमण
तथा व्यायाम) तथा संतुलित आहार (खानपान)
यहीं है जीवन का सार
स्वास्थ्य का राज
खाने से पहले जो
पानी पीये तो वह योगी होता है।
खाने के बीच में जो
पानी पीये वह भोगी होता है।
खाने के अन्त में जो
पानी पीये वह रोगी होता है।
मित्र और शत्रु कौन
शत्रु – काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह, आलस्य, द्वेष, भय और शंका आदि।
मित्र - धैर्य (धीरज), धर्म, मित्र और नारी - इन सब को विपत्ति के समय परखना चाहिए।
सुखी कौन
पहला सुख है -
निरोगी काया।
दूसरा सुख है -
भरपूर माया (पैसा)
तीसरा सुख है -
आज्ञाकारी पुत्र
चौथा सुख है-
पतिव्रता नारी।
यदि ये सब है तो रहो प्रभू के सदा आभारी।
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