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Showing posts from March, 2020

Vocabulary

1. Lesson : पाठ, सबक 2. Lessen : कम होना, घटना 3. Soil : मिट्टी 4. Sacred : पवित्र 5. Dainty : स्वादिस्ट

हमारी सोच हमारी भूल

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हम सोचते हैं कि हम जो सोचते हैं जो कहते हैं , जो सुनते हैं और जो करते हैं , वही सही है , उसे कोई नहीं देखता है ऐसा सोचना हमारी बड़ी भारी भूल है । हमें जन्म देने , पालन करने तथा मारने वाली भी एक महान अदृश्य शक्ति है जिसे हम सभी ईश्वर, अल्लाह, गॉड आदि नामों से याद करते हैं अथवा महसूस करते हैं । वही शक्ति हमारे कार्यों को देखती है, सुनती है और उन्हीं के आधार पर हमें उनका फल देती रहती है । वास्तव में हम सभी कुछ उसकी इच्छानुसार ही करते हैं इसमें इसमें लेशमात्र भी संदेह नहीं है । हम तो इस संसार में जन्म लेते हैं और पूर्व कर्मों के फलानुसार कार्य कर तथा अपने विवेकानुसार कार्यों को करके फल दुख एवं सुख को भोग कर मृत्यु लोक को चले जाते हैं । हम अपनी थोड़ी सी शक्ति, ज्ञान एवं धन जो वास्तव में उसी शक्ति (ईश्वर) की कृपा से प्राप्त करते हैं पर गर्व करने लगते हैं गर्व बढ़ने पर हम विवेकहीन होकर अपनी प्राप्त हुई शक्ति, ज्ञान एवं धन को खोकर स्वयं समाप्त कर बैठते हैं । मनुष्य नाशवान है अतः उसका ज्ञान, धन, शक्ति भी नाशवान है युगो युगो से इतिहास हमें यही बताता है कि जीव संसार में जन्म लेता ह...

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Awake : जागरूक, सतर्क करना Aware : सचेत, सावधान Awful : डरावना  Awkward : भद्दा, बेढंगा knotty : जटिल, मुश्किल

प्रकृति से सीखों :-

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प्रकृति से सीखों :- सूरज से सीखों - स्वयं तपकर भी दूसरों को प्रकाश देता है। चन्द्रमा से सीखों - दूसरों को शीतलता देता है। पवन से सीखों - दूसरों को जीवन देता है। वृक्ष से सीखों - दूसरों को फल तथा छाया देता है। शाखा से सीखों - झुकना सीखों। झरना-नदी से सीखों - निरंतर आगे बढ़ना। पर्वतों से सीखों - सदा अड़िग बने रहना। अग्नि से सीखों - तपाकर शुद्ध करना , पापों को जला देना। पृथ्वी से सीखों - कष्ट सह कर भी दूसरों की सेवा करना। आकाश से सीखों - सब को आश्रय देना। पुष्प से सीखों - सब को खशबू देकर प्रसन्न करना। पशु व पक्षियों से सीखों - दूसरों के हिस्से को बटोरकर न रखना। आओं हम भी प्रकृति के एक अंग होने के नाते दूसरों की सहायता करें तथा अपनी जरूरत से अधिक बटोरकर न रखें।

आज के सुविचार

आज के सुविचार शायद प्रकृति हमसे कुछ कहना चाहती हो... अपनो से, अपने आप से, मुलाकात "करो ना" !  मानो या ना मानो, कोई तो दिव्यशक्ती है, जो आपसे, मुझसे, हम सबसे ज्यादा बड़ी है! जो आपसे और मुझसे कहीं ज्यादा समझती और समझा सकती है!  क्या पता इस तेज वायरस के भय में ज़िन्दगी का कोई ऐसा सच़ छुपा हो, जो आप और मैं, अब तक नकार रहे थे ? शायद प्रकृति हम से कुछ कहना चाह रही थी पर जीवन की पागल आपा-धापी में हमें वक्त ही नहीं मिलता की हम उसकी या किसी की, कुछ भी सुने। हो सकता है कि, ये वायरस हमें फिर जोड़ने आया है - अपनी धरा से, अपनों से और अपने आप से! शायद हवाई जहाज का कार्बन कम हो तो आकाश भी अपने फेफड़ों में ऑक्सीजन भर पाएगा।  शॉपिंग मॉल, सिनेमा घरों में कुछ दिन के लिए ताले लगे तो शायद दिल के ताले स्वतः ही खुल जाएंगे।  हो सकता है किताब के पन्नों में सिनेमा से अधिक रस मिले। बच्चों को अपने जीवन के किस्से सुनाने का और उनसे उनकी मासूम कहानियां सुनने का आपको वक्त मिले! लूड़ो की बाज़ी या कैरम की गोटियां आपको अपनो के करीब ला दे। शायद पता चल जाए, घर के खाने में रेस्टोरेंट...

हमारे विचार हमारी पहचान

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भरोसा बहुत बडी पूंजी है..यूंही नहीं बांटी जाती... यह खुद पर रखो तो ताकत..और दूसरे पर रखो तो कमजोरी बन जाता हैं...! --------------------------------------------------------------------------- पूरे की इच्छा में मनुष्य बहुत कुछ खोता है,  भूल जाता है कि आधा चंद्रमा  भी बेहद सुन्दर होता है.. ---------------------------------------------------------------------------- जैसे घर को बनाने में एक-एक ईंट का महत्व होता है। वैसे ही चरित्र को बनाने में भी एक-एक विचार का महत्त्व है, इसलिये अपने विचारों को शुद्ब बनाइये। 
बड़ों के द्वारा दिये गए उपदेश चौराहे की रेड लाइट की तरह है  जो बुरा मानने के लिए नहीं, बल्कि एक्सीडेंट रोकने के लिए होते है
जीवन का सार पहले सोचों ] फिर समझों तब बोलो ] फिर करो तीन बातों को ध्यान में रखों : - 1 कम खाना 2 कम सोना 3 गम खाना (संयमं) ये स्वास्थ्य के लक्षण है। प्रातः विहार (भ्रमण तथा व्यायाम) तथा संतुलित आहार (खानपान) यहीं है जीवन का सार स्वास्थ्य का राज खाने से पहले जो पानी पीये तो वह योगी होता है। खाने के बीच में जो पानी पीये वह भोगी होता है। खाने के अन्त में जो पानी पीये वह रोगी होता है। मित्र और शत्रु कौन   शत्रु – काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह, आलस्य, द्वेष, भय और शंका आदि। मित्र - धैर्य (धीरज), धर्म, मित्र और नारी - इन सब को विपत्ति के समय परखना चाहिए। सुखी कौन पहला सुख है - निरोगी काया। दूसरा सुख है - भरपूर माया (पैसा) तीसरा सुख है - आज्ञाकारी पुत्र चौथा सुख है- पतिव्रता नारी। यदि ये सब है तो रहो प्रभू के सदा आभारी।
एक वर्ष में कम से कम 1 बार अपने शरीर की जाँच जरूर करवाएँ। मनुष्य को 1 दिन में कम से कम 6 से 8 घंटे की नींद आवश्यक है। बीमार होने पर तुरन्त इलाज करवाना चाहिए अन्यथा छोटी बीमारी बड़ा रूप में आपके सामने आ सकती है। सप्ताह में एक बार उपवास अवश्य रखें। अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रसन्न रहना (हंसना) अति आवश्यक है।

हमारे विचार हमारी पहचान

अकेले हम बूँद हैं, मिल जाएं तो सागर हैं। अकेले हम धागा हैं, मिल जाएं तो चादर .. अकेले हम ईंट पत्थर हैं, मिल जाएं तो इमारत हैं। जीवन का आनन्द मिलजुल कर रहने में है !!!! मानो तो एक "रूह का रिश्ता" है हम सभी का...!! ना मानों तो "कौन "क्या " लगता" है किसी का। ############################################ जीवन में सुख साधन से संपन्न व्यक्ति भाग्यशाली कहलाते हैं, लेकिन..... परम सौभाग्यशाली वो होते हैं, जिनके पास...... " "भोजन के साथ भूख भी हो" "बिस्तर के साथ नींद भी हो" "धन के साथ धर्म भी हो" और...... "विशिष्टता के साथ शिष्टता भी हो।"

छोटी बात - व्यक्तिगत सफाई - बीमारियाँ और परेशानियाँ

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व्यकितगत सफाई: नाखून सदैव काटे व दांत प्रत्येक खाने के पश्चात साफ रखें (ब्रुश से) खाना खाने से पहले तथा बाद में और टायलेट जाने के पश्चात् हाथों को साफ (साबुन से करें।) पानी अधिक पीये (कम से कम 10 गिलास प्रतिदिन) खाना खाने के 1 घंटा पहले अथवा एक घंटा बाद पीये। खाना सादा, पोष्टिक, सन्तुलित, ताजा, विटामिन युक्त तथा हल्का खाना चाहिए उसमें कार्बोहाइडे ª ट, वसा, प्रोटीन व खनिज लवण पदार्थ हो। अपने शरीर के सभी अंगों, वस्त्रों तथा अपने चारों ओर सफाई तथा अपने विचारों को शुद्ध रखना चाहिए। हमारी दिनचर्या में शारीरिक परिश्रम न कम और न अधिक होना चाहिए अर्थात कम करने से भी अनेक बीमारियाँ जैसे मोटापा, गैस ट्रबल, जोड़ों में अकड़न, भूख न लगना, सांस फूलना आदि- आदि तथा परिश्रम अधिक करने से भी टैंशन, डाइबिटीज हृदय रोग, ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन आदि बीमारियों के शिकार हो जाते है। सुबह-शाम तीन-चार किलोमीटर अवश्य खुली हवा में धूमना चाहिए।