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जरा सोचिये ...

जैसे हमारे विचार - वैसे ही हम बन जाते हैं - विचारों में अद्भुत ताकत है। चार सूत्र का पालन करें - सदैव लाभकारी अल्पाहार , समय पर खाएं , इंद्रियों पर काबू रखो। प्रसन्न रहना है तो आवश्यकता और परिस्थितियों में तालमेल बनाए रखें। मन में भावनाएं उमड़ रही हो तो नो प्रॉब्लम लिखना शुरू कीजिए। मुस्कुराते रहो खुशियां लुटाते रहो चंद लम्हों का साथ सुहाना बनाते चलो। यौवन में दिन छोटे वर्ष बड़े और वृद्धावस्था में वर्ष छोटे दिन बड़े ऐसा प्रतीत होता है । चिंता चिता के समान है इसी प्रकार मैदा (आटा) मैदे अथार्त पाचन तंत्र को खा जाता है जिसके कारण पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है । हाथ में लिया गया कार्य कभी भी अधूरा न छोड़े उसे पूरा करें डालें। मेहनत करने वालों के पास गरीबी नहीं रहती। जब तक शरीर निरोग है मृत्यु दूर है। कार्य को एकाग्र रूप से करेंगे तो गलती ही नहीं होगी। मन को वश में करके बुद्धि से कार्य करें। स्वस्थ रहने के लिए दिमाग एवं पेट का साफ रहना जरूरी है। विचार तभी हो सकता है जब मन एकाग्र हो। अपवित्र कल्पना भी उतनी ही बुरी होती है जितना कि पवित्र कार्य। सत्य बोलने से मन शुद्ध होता ह...

Vocabulary

1. Lesson : पाठ, सबक 2. Lessen : कम होना, घटना 3. Soil : मिट्टी 4. Sacred : पवित्र 5. Dainty : स्वादिस्ट

हमारी सोच हमारी भूल

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हम सोचते हैं कि हम जो सोचते हैं जो कहते हैं , जो सुनते हैं और जो करते हैं , वही सही है , उसे कोई नहीं देखता है ऐसा सोचना हमारी बड़ी भारी भूल है । हमें जन्म देने , पालन करने तथा मारने वाली भी एक महान अदृश्य शक्ति है जिसे हम सभी ईश्वर, अल्लाह, गॉड आदि नामों से याद करते हैं अथवा महसूस करते हैं । वही शक्ति हमारे कार्यों को देखती है, सुनती है और उन्हीं के आधार पर हमें उनका फल देती रहती है । वास्तव में हम सभी कुछ उसकी इच्छानुसार ही करते हैं इसमें इसमें लेशमात्र भी संदेह नहीं है । हम तो इस संसार में जन्म लेते हैं और पूर्व कर्मों के फलानुसार कार्य कर तथा अपने विवेकानुसार कार्यों को करके फल दुख एवं सुख को भोग कर मृत्यु लोक को चले जाते हैं । हम अपनी थोड़ी सी शक्ति, ज्ञान एवं धन जो वास्तव में उसी शक्ति (ईश्वर) की कृपा से प्राप्त करते हैं पर गर्व करने लगते हैं गर्व बढ़ने पर हम विवेकहीन होकर अपनी प्राप्त हुई शक्ति, ज्ञान एवं धन को खोकर स्वयं समाप्त कर बैठते हैं । मनुष्य नाशवान है अतः उसका ज्ञान, धन, शक्ति भी नाशवान है युगो युगो से इतिहास हमें यही बताता है कि जीव संसार में जन्म लेता ह...

Vocabulary

Awake : जागरूक, सतर्क करना Aware : सचेत, सावधान Awful : डरावना  Awkward : भद्दा, बेढंगा knotty : जटिल, मुश्किल

प्रकृति से सीखों :-

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प्रकृति से सीखों :- सूरज से सीखों - स्वयं तपकर भी दूसरों को प्रकाश देता है। चन्द्रमा से सीखों - दूसरों को शीतलता देता है। पवन से सीखों - दूसरों को जीवन देता है। वृक्ष से सीखों - दूसरों को फल तथा छाया देता है। शाखा से सीखों - झुकना सीखों। झरना-नदी से सीखों - निरंतर आगे बढ़ना। पर्वतों से सीखों - सदा अड़िग बने रहना। अग्नि से सीखों - तपाकर शुद्ध करना , पापों को जला देना। पृथ्वी से सीखों - कष्ट सह कर भी दूसरों की सेवा करना। आकाश से सीखों - सब को आश्रय देना। पुष्प से सीखों - सब को खशबू देकर प्रसन्न करना। पशु व पक्षियों से सीखों - दूसरों के हिस्से को बटोरकर न रखना। आओं हम भी प्रकृति के एक अंग होने के नाते दूसरों की सहायता करें तथा अपनी जरूरत से अधिक बटोरकर न रखें।

आज के सुविचार

आज के सुविचार शायद प्रकृति हमसे कुछ कहना चाहती हो... अपनो से, अपने आप से, मुलाकात "करो ना" !  मानो या ना मानो, कोई तो दिव्यशक्ती है, जो आपसे, मुझसे, हम सबसे ज्यादा बड़ी है! जो आपसे और मुझसे कहीं ज्यादा समझती और समझा सकती है!  क्या पता इस तेज वायरस के भय में ज़िन्दगी का कोई ऐसा सच़ छुपा हो, जो आप और मैं, अब तक नकार रहे थे ? शायद प्रकृति हम से कुछ कहना चाह रही थी पर जीवन की पागल आपा-धापी में हमें वक्त ही नहीं मिलता की हम उसकी या किसी की, कुछ भी सुने। हो सकता है कि, ये वायरस हमें फिर जोड़ने आया है - अपनी धरा से, अपनों से और अपने आप से! शायद हवाई जहाज का कार्बन कम हो तो आकाश भी अपने फेफड़ों में ऑक्सीजन भर पाएगा।  शॉपिंग मॉल, सिनेमा घरों में कुछ दिन के लिए ताले लगे तो शायद दिल के ताले स्वतः ही खुल जाएंगे।  हो सकता है किताब के पन्नों में सिनेमा से अधिक रस मिले। बच्चों को अपने जीवन के किस्से सुनाने का और उनसे उनकी मासूम कहानियां सुनने का आपको वक्त मिले! लूड़ो की बाज़ी या कैरम की गोटियां आपको अपनो के करीब ला दे। शायद पता चल जाए, घर के खाने में रेस्टोरेंट...

हमारे विचार हमारी पहचान

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भरोसा बहुत बडी पूंजी है..यूंही नहीं बांटी जाती... यह खुद पर रखो तो ताकत..और दूसरे पर रखो तो कमजोरी बन जाता हैं...! --------------------------------------------------------------------------- पूरे की इच्छा में मनुष्य बहुत कुछ खोता है,  भूल जाता है कि आधा चंद्रमा  भी बेहद सुन्दर होता है.. ---------------------------------------------------------------------------- जैसे घर को बनाने में एक-एक ईंट का महत्व होता है। वैसे ही चरित्र को बनाने में भी एक-एक विचार का महत्त्व है, इसलिये अपने विचारों को शुद्ब बनाइये।