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जरा सोचिये ...

जैसे हमारे विचार - वैसे ही हम बन जाते हैं - विचारों में अद्भुत ताकत है। चार सूत्र का पालन करें - सदैव लाभकारी अल्पाहार , समय पर खाएं , इंद्रियों पर काबू रखो। प्रसन्न रहना है तो आवश्यकता और परिस्थितियों में तालमेल बनाए रखें। मन में भावनाएं उमड़ रही हो तो नो प्रॉब्लम लिखना शुरू कीजिए। मुस्कुराते रहो खुशियां लुटाते रहो चंद लम्हों का साथ सुहाना बनाते चलो। यौवन में दिन छोटे वर्ष बड़े और वृद्धावस्था में वर्ष छोटे दिन बड़े ऐसा प्रतीत होता है । चिंता चिता के समान है इसी प्रकार मैदा (आटा) मैदे अथार्त पाचन तंत्र को खा जाता है जिसके कारण पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है । हाथ में लिया गया कार्य कभी भी अधूरा न छोड़े उसे पूरा करें डालें। मेहनत करने वालों के पास गरीबी नहीं रहती। जब तक शरीर निरोग है मृत्यु दूर है। कार्य को एकाग्र रूप से करेंगे तो गलती ही नहीं होगी। मन को वश में करके बुद्धि से कार्य करें। स्वस्थ रहने के लिए दिमाग एवं पेट का साफ रहना जरूरी है। विचार तभी हो सकता है जब मन एकाग्र हो। अपवित्र कल्पना भी उतनी ही बुरी होती है जितना कि पवित्र कार्य। सत्य बोलने से मन शुद्ध होता ह...