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जरा सोचिये ...
- जैसे हमारे विचार - वैसे ही हम बन जाते हैं - विचारों में अद्भुत ताकत
है।
- चार सूत्र का पालन करें - सदैव लाभकारी अल्पाहार, समय पर खाएं, इंद्रियों पर काबू रखो।
- प्रसन्न रहना है तो आवश्यकता और परिस्थितियों में तालमेल बनाए रखें।
- मन में भावनाएं उमड़ रही हो तो नो प्रॉब्लम लिखना शुरू कीजिए।
- मुस्कुराते रहो खुशियां लुटाते रहो चंद लम्हों का साथ सुहाना बनाते चलो।
- यौवन में दिन छोटे वर्ष बड़े और वृद्धावस्था में वर्ष छोटे दिन बड़े ऐसा
प्रतीत होता है ।
- चिंता चिता के समान है इसी प्रकार मैदा (आटा) मैदे अथार्त पाचन तंत्र को खा
जाता है जिसके कारण पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है ।
- हाथ में लिया गया कार्य कभी भी अधूरा न छोड़े उसे पूरा करें डालें।
- मेहनत करने वालों के पास गरीबी नहीं रहती।
- जब तक शरीर निरोग है मृत्यु दूर है।
- कार्य को एकाग्र रूप से करेंगे तो गलती ही नहीं होगी।
- मन को वश में करके बुद्धि से कार्य करें।
- स्वस्थ रहने के लिए दिमाग एवं पेट का साफ रहना जरूरी है।
- विचार तभी हो सकता है जब मन एकाग्र हो।
- अपवित्र कल्पना भी उतनी ही बुरी होती है जितना कि पवित्र कार्य।
- सत्य बोलने से मन शुद्ध होता है मन को जीत लेना जग जीत लेना है।
- प्रत्येक व्यक्ति के घर में आयुर्वेदिक दवाखाना खाना चाहिए।
- शरीर के शुद्ध हो जाने पर ही औषधि फायदा करती है जैसे सफ़ेद वस्त्र पर ही रंग
चढ़ता है।
- अकेले की अपेक्षा सहयोग अधिक लाभदायक है।
- प्रगति ही जीवन है।
- विजय उसी की होती है जो विजय होने का एहसास करेगा।
- आशा पर जीने वाले अधिकतर भूखे मरते हैं।
- ईश्वर का भय मानव के हृदय मंदिर का दीप है अगर यह ना हो तो मानव अपने मार्ग से
भटक जाएगा।
- क्रोध की बीमारी से बचो इसका आरंभ पागलपन है तथा अंत पछतावा ही है।
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